स्वच्छ भारत मिशन में जनजागरूकता अभियान का प्रभाव -एक अध्ययन

 

डॉ0 विवेक कुमार पटेल1, अंशुल गुप्ता2

1विभागाध्यक्ष (वाणिज्य) शास. महाविद्यालय कोतमा जिला अनूपपुर (0प्र0)

2शोधार्थी (वाणिज्य) शास. महाविद्यालय कोतमा जिला अनूपपुर (0प्र0)

*Corresponding Author E-mail:

 

ABSTRACT:

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने महात्मा गांधी जी की जयंती 02 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की, स्वच्छ भारत अभियान को भारत मिशन और स्वच्छता अभियान भी कहा जाता है। महात्मा गांधी जी की जयंती के अवसर पर माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी महात्मा गांधी जी की 145 वी जयंती के अवसर पर इस अभियान की शुरुआत की 2 अक्टूबर 2014 को उन्होंने राजपथ पर जनसमूहों को संबोधित करते हुए राष्ट्रवादीओं से स्वच्छ भारत अभियान में भाग लेने और इसे सफल बनाने को कहा साफ-सफाई के संदर्भ में यह सबसे बड़ा अभियान है। साफ-सफाई को लेकर भारत की छवि को बदलने के लिए श्री नरेंद्र मोदी जी ने देश को एक मुहिम से जोड़ने के लिए जन आंदोलन बनाकर इसकी शुरुआत की।

 

KEYWORDS: स्वच्छ भारत अभियान, स्वच्छता, शौचालय का निर्माण, जनजागरूकता।

 

 


प्रस्तावना

अवधारणात्मक विश्लेषण:-

स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा आरम्भ किया गया राष्ट्रीय स्तर का अभियान है जिसका उद्देश्य गलियों, सड़कों तथा अधोसंरचना को साफ-सुथरा करना और कूड़ा साफ रखना है। यह अभियान 2 अक्टूबर, 2014 को आरम्भ किया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने देश को दासता से मुक्त कराया, परन्तुस्वच्छ भारतका उनका सपना पूरा नहीं हुआ। महात्मा गांधी ने अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने सम्बन्धी शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र को एक उत्कृष्ट सन्देश दिया था।

स्वच्छ भारत का उद्देश्य व्यक्ति, क्लस्टर और सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के माध्यम से खुले में शौच की समस्या को कम करना या समाप्त करना है। स्वच्छ भारत मिशन विसर्जन उपयोग की निगरानी के जवाबदेह तन्त्र को स्थापित करने की भी एक पहल सरकार ने 2 अक्टूबर 2019, महात्मा गांधी के जन्म की 150वीं वर्षगाँठ तक ग्रामीण भारत में 1.96 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 1.2 करोड़ शौचालयों का निर्माण करके खुले में शौंच मुक्त भारत (ओडीएफ) को हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

स्वच्छता ना केवल हमारे घर सड़क तक के लिए ही जरूरी नहीं होती है। यह देश और राष्ट्र की आवश्यकता होती इससे ना केवल हमारा घर आँगन ही स्वच्छ रहेगा पूरा देश ही स्वच्छ रहेगा। इसी को मद्देनजर रखते हुए भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही स्वच्छ भारत अभियान जो कि हमारे देश के प्रत्येक गांव और शहर में पराम्भ की गई है, जो देश के प्रत्येक गली गांव की प्रत्येक सड़कों से लेकर शौचालय का निर्माण कराना और देश के बुनियादी ढांचे को बदलना ही इस अभियान का उद्देश्य है।

स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्य -

(1) खुले में शौच बंद करवाना जिसके तहत हर साल हजारों बच्चों की मौत हो जाती है।

(2) लगभग 11 करोड़ 11 लाख व्यक्तिगत, सामूहिक शौचालयों का निर्माण करवाना जिसमे 1 लाख 34 हजार करोड रुपए खर्च होंगे।

(3) लोगों की मानसिकता को बदलना उचित स्वच्छता का उपयोग करना।

(4) शौचालय उपयोग को बढ़ावा देना और सार्वजनिक जागरूकता को शुरू करना।

(5) गांवो को साफ रखना।

(6) जिले के सभी घरों में पानी की पूर्ति सुनिश्चित करके गांवों में पाइपलाइन लगवाना जिससे स्वच्छता बनी रहे।

(7) ग्राम पंचायत के माध्यम से ठोस और तरल अपशिष्ट की अच्छी प्रबंधन व्यवस्था सुनिश्चित करना।

(8) सड़के फुटपाथ ओर बस्तियां साफ रखना।

(9) साफ सफाई के जरिए सभी में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना।

स्वच्छ भारत अभियान में अन्य योगदान

स्वच्छ भारत अभियान में ना केवल आम लोग, सरकारी मंत्रालय के साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा सहयोग प्रदान करने वाले लोगों में मृदुला सिन्हा, बाबा रामदेव, शशी थरूर, कमल हासन, सलमान खान, प्रियंका चोपड़ा जैसे बड़े-बड़े हस्तियां अपना योगदान दिखा रहे है। जो परिवर्तन आप दुनिया में देखना चाहते हैं वह सबसे पहले अपने आप में लागू करें।

महात्मा गांधी।

महात्मा गांधी द्वारा कहे गए यह कथन जो कि स्वच्छता पर ही आधारित है। उनके अनुसार स्वच्छता की जागरूकता की मशाल सभी में पैदा होने चाहिए इसके तहत स्कूलों में भी स्वच्छ भारत अभियान के कार्य होने लगे हैं स्वच्छता से ना केवल हमारा तन साफ रहता है। हमारा मन भी साफ रहता है। स्वच्छ भारत अभियान की मशाल आज हमारे पूरे भारत के लिए आवश्यक है जिसके तहत कई कार्य किये जा रहे है। स्वछता का सीधा सम्बन्ध हमारे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। अतः यह कहना गलत नहीं होगा की एक स्वच्छ शरीर में ही एक स्वस्थ मन का निवास होता है, आज से सौ वर्ष पहले महात्मा गाँधी ने एक स्वच्छ भारत का सपना देखा, जो आज साकार हो रहा है।

 

पूर्व में किये गये कार्य का संक्षिप्त विवरण:-

मेहरोत्रा और पटनायक (2008) के अनुसार, जैसा कि उनके लेख ‘‘संस्कृति बनाम मजबूरी: निर्मल ग्राम योजना के अन्य पक्ष’’ ‘‘इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली’’ में प्रकाशित, स्वच्छता कार्यक्रम, निर्मल ग्राम योजना, में टॉप-डाउन पर जोर दिया गया है। बस्तर में दृष्टिकोण विफल हो गया है क्योंकि इसे ऐसे क्षेत्र में लोगों पर थोपा जा रहा है जहां पानी की कमी है और उनके पास रखरखाव के लिए बहुत कम संसाधन हैं।

 

बेनी जॉर्ज (2009) ने ‘‘इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली’’ में ‘‘स्वच्छता कार्यक्रमः एक गिलास आधा भरा’’ पर चर्चा की। स्वच्छता के मुद्दे को सार्वजनिक चर्चा में लाने के लिए लेख ‘‘संस्कृति बनाम मजबूरीः निर्मल ग्राम योजना के अन्य पक्ष’’ के माध्यम से किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए, यह टिप्पणी कार्यक्रमों की कथित कमियों पर कुछ स्पष्टीकरण प्रदान करती है। यह हमारे देश में पूर्ण स्वच्छता प्राप्त करने पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए एक मजबूत मामला भी बनाता है।

 

चोपड़ा, एट अल (2012) ने अपनी रिपोर्ट ‘‘भारत के हरित ग्रामीण विकास’’ में कई सामाजिक कल्याण और ग्रामीण विकास योजनाओं पर चर्चा की। निर्मल भारत अभियान - पूर्व में पूर्ण स्वच्छता अभियान (टीएससी) - ने हाल ही में ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच के उन्मूलन से लेकर व्यापक स्वच्छता तक अपने दायरे का विस्तार किया है। परियोजना निधि का दस प्रतिशत ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए निर्धारित किया गया है। एनबीए ठोस और तरल कचरे का सुरक्षित निपटान सुनिश्चित कर सकता है, और अनुपचारित अपशिष्ट जल को जल प्रणाली में फिर से प्रवेश करने से रोक सकता है। इन परिणामों से पानी की गुणवत्ता में काफी सुधार हो सकता है।

डीन स्पीयर्स (2012) ने ‘‘भारत के संपूर्ण स्वच्छता अभियान को लागू करने से नीति सबक’’ शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की। व्यापक खुले में शौच को समाप्त करना और सुरक्षित मलमूत्र निपटान के व्यवहार्य तरीकों को अपनाना भारत के लिए सर्वाेच्च नीतिगत प्राथमिकता होनी चाहिए। यह पेपर भारत सरकार के एक प्रमुख कार्यक्रम, भारत के संपूर्ण स्वच्छता अभियान (ज्ैब्) के तहत शौचालय निर्माण के पहले दस वर्षों से नीतिगत सबक लेता है। अब तक, टीएससी उन भारतीय बच्चों के बीच औसत स्वास्थ्य और मानव पूंजी में सुधार करने में सक्षम रहा है जहां इसे लागू किया गया है, लेकिन स्वच्छता कवरेज काफी हद तक अधूरा है। वास्तव में, टीएससी के पहले दस वर्षों में, औसतन, कुछ हज़ार डॉलर के लिए एक शिशु मृत्यु को रोका जा सकेगा, जो तुलनात्मक रूप से बहुत सस्ती औसत लागत है। यह प्रारंभिक सफलता कुछ हद तक स्वच्छ ग्राम पुरस्कार या निर्मल ग्राम पुरस्कार (एनजीपी) के कारण है, जो ग्राम सरकारों के लिए एक प्रोत्साहन है। टीएससी कार्यान्वयन की तीव्रता और प्रभावशीलता में विषमता से पता चलता है कि कई शेष भारतीय बच्चों को प्रभावी टीएससी कार्यान्वयन का विस्तार करने के अतिरिक्त लाभ शायद अतिरिक्त लागत से अधिक होंगे। इसलिए, जैसा कि टीएससी निर्मल भारत अभियान बन गया है, भारत को पूर्ण स्वच्छता के सफल सिद्धांतों में निवेश करने का अवसर नहीं छोड़ना चाहिए: गुणवत्ता डेटा, प्रभावी निगरानी, और प्रेरक पूर्व पोस्ट प्रोत्साहन।

सुप्रीता देसाई (2018) जून 2018 तक स्वच्छ भारत अभियान में 7.5 करोड़ से अधिक परिवार, 3.8 लाख खुले में शौच मुक्त गाँव, नमामि गंगे में 4,465 से अधिक खुले में शौच मुक्त गाँव, 395 खुले में शौच मुक्त जिले और 17 खुले में शौच मुक्त राज्य/केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।

शोध क्षेत्र:-

चूँकि शोधार्थी का अध्ययन क्षेत्र रीवा जिला को लिया गया है। रीवा जिला का क्षेत्रफल 6314 वर्ग किमी. है। जनगणना 2011 के अनुसार रीवा जिले की जनसंख्या 2365106 है, जिसमें पुरूष 1225100 एवं महिला 1140006 शेष एवं अन्य वृद्ध एवं बच्चे सम्मिलित है। रीवा जिले का जनसंख्या वृद्धि 19ण्86 है, जिले का लिंग अनुपात 1000 पुरूष पर 931 महिला है तथा साक्षरता दर 71ण्62 है जिसमें पुरूष साक्षरता 81ण्43 एवं महिला साक्षरता 61ण्16 है। रीवा जिले जनसंख्या घनत्व 375 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. है।

शोध प्रविधि:-

शोध या अन्वेषण किसी विशिष्ट प्रयोजन के लिए किया जाता है। ज्ञान की किसी भी शाखा में ध्यानपूर्वक नये तथ्यों की खोज के लिए किये गये अन्वेषण या परिक्षण को अध्ययन कहते है। ज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य अपरिहार्य है।

शोध कार्य में रीवा जिले में स्वच्छ भारत मिशन से संबंधित वास्तविक एवं विश्वसनीय आकड़ो को प्राप्त करने के लिये प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों प्रकार के आकड़ों को एकत्र कर पूर्ण किया गया है। प्राथमिक आकड़े स्वयं नगर निगम, जिला/जनपद/ग्राम पंचायतों एवं स्थानीय लोगों के घर पर जाकर मूल स्रोतो से एकत्र किये गये हैं। जबकि द्वितीयक आंकड़े के लिये स्वच्छ भारत मिशन से संबंधित विभिन्न प्रकाशित- अप्रकाशित पुस्तकों, शोध पत्र-पत्रिकाओं, समाचार पत्रों, शासकीय प्रतिवेदनों आदि से एकत्र कर प्रयोग किये गये हैं। इसके अतिरिक्त लाइब्रेरी, एवं इंटरनेट आदि का भी आकड़ें एवं विषय वस्तु से संबंधित स्टडी मटेरियल एकत्र करने में प्रयोग किया गया है।

अध्ययन का उद्देश्य:-

इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारियों को यह सूचित करना और मार्गदर्शन करना था कि स्वच्छता, स्वास्थ्य और स्वच्छता, स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल आदि और प्रथाओं में बदलाव के बारे में समुदाय कितना जागरूक है। अध्ययन के व्यापक उद्देश्य इस प्रकार थे -

    रीवा जिले में स्वच्छ भारत मिशन की प्रकृति, कार्यक्षेत्र और विशेषताओं का अध्ययन करना।

    रीवा जिले में स्वच्छ भारत मिशन के क्रियान्वयन का अध्ययन करना।

    स्वच्छ भारत मिशन के सफल क्रियान्वयन के बाद, रीवा जिले में में होने वाले सामाजिक और पर्यावरणीय परिवर्तन का अध्ययन करना।

    स्वच्छ पर्यावरण पर जनता की धारणा पर स्वच्छ भारत मिशन के प्रभाव को समझना।

    स्वच्छ भारत अभियान के कारण स्वच्छ पर्यावरण के प्रति जनता का रवैया एवं स्वच्छता में सुधार का पता लगाना।

    स्वच्छता, स्वास्थ्य और स्वच्छता से संबंधित धारणा और प्रथाओं का आंकलन करना।

    जिले के स्वच्छ भारत मिशन के पदाधिकारियों के ज्ञान के स्तर का आंकलन करना।

    स्वच्छ भारत मिशन द्वारा किए गए प्रावधानों, इसकी उपयोगिता और लाभार्थियों द्वारा उपयोग की जांच करना।

    जागरूकता सृजन और स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से स्थायीय शौचालय की सुविधा को बढ़ावा देने के समुदायों और पंचायती राज संस्थाओं को प्रेरित करना।

अध्ययन का दायरा

वर्तमान अध्ययन का दायरा इस प्रकार है -

    रीवा़ जिले के नगर निगम एवं ग्राम पंचायतों से प्रश्नावली और साक्षात्कार कार्यक्रम के माध्यम से आंकड़े एकत्र करें। समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत की गई, नमूना ग्राम पंचायतों में आरोग्य संयोगिकों और सेविकों के साथ भी बातचीत की गई।

    लाभार्थियों के बीच जागरूकता में वृद्धि, व्यवहारिक और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन जैसे विभिन्न कारकों के माध्यम से मापी गई परियोजना के प्रभाव का पता लगाने के लिए एकत्रित आंकड़ों का विश्लेषण और अध्ययन के दौरान किए गए अवलोकनों को शामिल करना।

    व्यावहारिक निहितार्थों का पता लगाना और प्रक्रिया और अन्य कारकों में सुधार करने का सुझाव देना। विशेष रूप से पीआरआई सदस्यों और उच्च प्राथमिक विद्यालय के छात्रों और शिक्षकों को कार्यक्रम की पहुंच की जांच करना।

परिकल्पना:-

    स्वच्छ पर्यावरण के प्रति जनता का नजरिया बदल गया है।

    समाचार पत्र स्वच्छ भारत अभियान के बारे में पर्याप्त जानकारी प्रदान करते हैं।

    स्वच्छ भारत मिशन द्वारा स्वच्छता अभियान में लोगों की भागीदारी को उत्प्रेरित करेगा।

    योजना का लाभ हितग्राहियों को प्राप्त हो रहा है।

    इस योजना में लगा वित्तीय अनुदान का सही उपयोग हो रहा है।

    स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम में शासन की भूमिका संतोषप्रद है।

    स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम के लागू होने से लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है।

    प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय राज्य घरेलू उत्पाद जितना अधिक होगा, स्वच्छ भारत मिशन उतना ही सफल होगा।

    साक्षरता दर जितनी अधिक होगी, स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से होने वाला लाभ उतना ही अधिक होगा।

    राज्यों में गरीबी का स्तर जितना अधिक होगा, स्वच्छ भारत मिशन को लागू करना उतना ही कठिन होगा।

 

प्र.1 क्या स्वच्छ भारत अभियान स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने से सम्बंधित अभियान है?

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स्वच्छ भारत अभियान स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने से सम्बंधित अभियान मानने वाले              80 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इस विकल्प पर पूर्ण सहमति दिखाई है जबकि कुल 15 प्रतिशत उत्तरदाता इस विषय पर कुछ कुछ सहमत थे, वहीं दूसरी और लगभग 2.5 प्रतिशत उत्तरदाता इस अभियान को लोगों को जागरूक करने वाले माध्यम के रूप में स्वीकार नहीं करते है जबकि लगभग 2 लोग इस विषय पर कुछ भी कहना नहीं चाहते।

 

प्र.2 स्वच्छ भारत अभियान के बारे में किस माध्यम से जानकारी प्राप्त की?

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उपरोक्त तालिका से स्पष्ट है कि लगभग 41 प्रतिशत उत्तररदाताआंे ने स्वच्छ भारत अभियान के बारे में टेलीविजन से जानकारी प्राप्त की। 26 प्रतिशत लोगों ने इस अभियान से संबन्धित जानकारी समाचार पत्रों 19 प्रतिशत ने इंटरनेट, 12 प्रतिशत ने रेडियो लगभग 02 प्रतिशत ने सिनेमा से प्राप्त की। इस शोध के अनुसार लोगों ने टेलीविजन के बाद समाचार पत्रों से इस अभियान के बारे में जानकारी प्राप्त की। प्राप्त प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि अधिकतर उत्तरदाता स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने हेतु टेलीविजन को अहम माध्यम मानते है। परन्तु सिनेमा से इस अभियान के बारे में जानकारी पाने वाले लोगों की संख्या सबसे कम पाई गई।

 

प्र.3 स्वच्छ भारत अभियान के विज्ञापन क्यों पसंद हैं?

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स्वच्छ भारत अभियान के प्रति रूचि जागृत करने में प्रभावशाली सन्देश, आकर्षक प्रस्तुतीकरण, आकर्षक स्लोगन तथा सेलिब्रेटी का प्रभाव आदि तत्वों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सबसे ज्यादा 50 प्रतिशत उत्तरदाता इस अभियान केप्रभावपूर्ण सन्देशक्षमता के कारण यह जनसेवी विज्ञापन पसंद करते है। इसके बाद दूसरे नंबर पर प्रतिष्ठित व्यक्ति द्वारा दिए गए सन्देश युक्त विज्ञापन को ज्यादा पसंद किया गया, इसकी कुल संख्या 28 प्रतिशत है। इस अभियान के आरम्भ से ही अमिताभ बच्चन, आमिर खान, सलमान खान जैसे अभिनेताओं के अलावा टेनिस स्टार सानिया मिर्जा शूटर अंजलि भगत, उद्योगपति अनिल अंबानी समेत बड़ी संख्या में प्रसिद्ध लोग स्वच्छ भारत अभियान के प्रचार से जुड़े हैं आकर्षक प्रस्तुतीकरण को सबसे प्रभावशाली तत्व मानने वालों की संख्या 17 प्रतिशत के लगभग है। जबकि विज्ञापन के स्लोगन को 5 प्रतिशत लोग प्रभावशाली तत्व मानते है। वस्ततुःप्रभावशाली सन्देशके कारण स्वच्छ भारत मिशन के विज्ञापनों को पसंद करने वाले ग्रामीणों की संख्या सर्वाधिक पाई गई है वहीं इस विज्ञापन अभियान को स्लोगन के कारण बहुत कम लोग को पसंद करते है।

 

प्र.4 स्वच्छ भारत अभियान में अगर शामिल हुए तो क्या कार्य किये या करवाए?

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सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों के अध्ययन से ज्ञात होता है कि स्वच्छता अभियान से सम्बंधित विज्ञापनों से प्रेरणा पाकर स्वच्छता अभियान में शामिल होने के बाद लोगों ने स्वयं कार्य किये या करवाए। अथवा अन्य लोगों की मदद से स्वच्छता सम्बन्धी इस विषय के सम्बन्ध में सर्वाधिक 39 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि जनसेवी विज्ञापनों से प्रेरणा पाकर अपने घर के आस पास सफाई के कार्य किये, 13 प्रतिशत लोगों नें गाँव के अन्य स्थानों की सफाई की, 28 प्रतिशत ने स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरणा पाकर शौचालयों के उपयोग लिए लोगों को प्रेरित किया जबकि 20 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि इस अभियान में शामिल होकर कूड़ा करकट का प्रबध्ंान किया।

 

उपसंहार:-

हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत हुई, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाना है। हमारे प्रधानमंत्री द्वारा इस अभियान का शुभारम्भ 02 अक्टूबर सन 2014 में महात्मा गाँधी के जन्मदिवस के दिन किया गया था और उसी समय इसके समापन की तिथि 02 अक्टूबर 2019 को गांधीजी की 150वें जन्मदिवस के दिन निर्धारित की गयी। हमे ये तो पता है की स्वछता का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है परन्तु हमने इसका अर्थ सिर्फ स्वयं के शरीर की सफाई से लगा लिया है, ये गलत है स्वछता को सिर्फ शरीर की सफाई तक सीमित करके हमने उसके अर्थ को संक्रीण बना दिया है। स्वच्छता, भक्ति के बाद दूसरी सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है, गांधीजी के अनुसार,”जब तक आप झाड़ू और बाल्टी अपने हाथों में नहीं लेते तब तक आप अपने शहर, गांव एवं कस्बे को स्वस्थ नहीं कर सकतेस्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत स्वयं हमारे प्रधानमंत्री ने झाड़ू लगा के की थी। स्वच्छ भारत अभियान का सफलतम क्रियान्वयन करना भारत जैसे बड़े शेत्रफ़ल् वाले देश मे अत्यन्त कठिन था, परन्तु हमारे प्रधानमंत्री के दृण संकल्प ने गांधीजी के इस सपने को सच कर दिखाया।

 

अभी हाल ही में हमारे प्रधानमंत्री जी को अमरीका में गोलकीपर ग्लोबल गोल्स नामक पुरस्कार से सम्मानित किया गया यह पुरस्कार उन्हें स्वच्छ भारत अभियान के उनके सफलतम क्रियान्वयन के लिए दिया गया। स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश के इंदौर शहर को लगातार तीन वर्षाे से भारत के सबसे स्वच्छ शहर के लिए पुरस्कृत किया जा रहा है, स्वच्छ भारत अभियान ने भारत की जनता में वैचारिक क्रांति उत्पन्न कर दी है। अब लोग सिर्फ स्वयं को स्वच्छ रखने की अपितु अपने गांव, जिला एवं शहर को भी स्वच्छ रखने की बात करते हैं, और इस दिशा में अपना भरसक योग दान भी दे रहे हैं। भारत में बहुत सी ऐसी सामजिक संस्स्थाएं भी हैं जो स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत अपना योगदान दे रही हैं, इन संस्थाओं के लोग गांव, कस्बो एवं शहरों में जा कर लोगो को स्वछता के प्रति जागरूक करते हैं और उन्हें स्वछता से होने वाले फायदों से अवगत कराते हैं।

 

सवा सौ करोड़ वाले भारत देश में इस मुहिम को चलाना एवं भली भांति इसका संपादन करना एक बहुत बड़ी चुनौती थी, हमे इस बात का गर्व है की भारत सरकार ये करने में सफल हुई, क्यूंकि इस अभियान ने जन-भावना का रूप जो ले लिया है, स्वच्छ भारत अभियान एक ऐसी पहल जिसमे हर जाति, वर्ग, और धर्म के लोगो ने बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया और इसे सफल भी बनाया।

 

संदर्भ ग्रन्थ सूची:-

·            शुक्ल, डॉ. अरविन्द. (2016). स्वच्छ भारत अभियान चुनौतियाँ एव अवसर. प्रथम संस्करण, कानपूरः अराधना ब्रदर्स.

·            सिंह, डा. निशांत. (2004). जनसंपर्क और विज्ञापन. प्रथम संस्करण, नई दिल्लीः राधा पब्लिकेशन्स.

·            सुधीर, डॉ. सोनी. (2003). संचार शोध प्रविधियां. जयपुरः विश्वविधालय प्रकाशन

·            खान, डॉ. एम. वर्मा, पी. (2016). स्वच्छ भारत अभियान का ग्राम पंचायत स्तरीय आलोचनात्मक विश्लेषण (ग्राम पंचायत बकैनिया जिला पीलीभीत के विशेष सन्दर्भ में). इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एडवांस्ड रिसर्च एंड डेवलपमेंट टवस.1 प्ेेनम 8ण्

·            गाँधी का आदर्श मोदी का संकल्प (2-8 अक्टूबर 2017) सुलभ स्वच्छ भारत, साप्ताहिक समाचार पत्रद्ध अंक 42, नई दिल्ली.

·            निष्ठा, अनुश्री (28 जून 2019). स्वच्छ भारत अभियान से कितना स्वस्थ हुआ भारत-कुछ डाटा कुछ अनुमान.

·            स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय-एक पुस्तिका. (2017) मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार।

·         Centre for Science and Environment. (2018). Swachh Bharat Survekshan- 2017 (Report). Retrived from www.indiaenvironment portal.org.in on 12 dec 2018.

·         HT Report (October 1, 2015). Swachh Bharat Abhiyan, Is Modi Scheme A Success One Year Letter, Hindustan Times.

 

 

 

Received on 26.03.2022            Modified on 09.04.2022

Accepted on 20.04.2022              © A&V Publications All right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2022; 10(1):49-55.